shaam suraj ke sang dhalti hain | शाम सूरज के संग ढलते हैं

  - Anubhav Gurjar
शामसूरजकेसंगढलतेहैं
रातभरचाँदनीमेंजलतेहैं
दिनमेंभीख़ासकुछनहींकरते
बससड़कपरहीतोटहलतेहैं
बोझहोताहैधनकमानेका
सुब्हकॉलेजजबनिकलतेहैं
आजभीसोचतेहैंजबतुमको
तोयेआँसूबहुतउबलतेहैं
हमतोपत्थरकेहोगएहीथे
इकतुम्हेंदेखकरपिघलतेहैं
बैठजाओबग़लमेंतुमजब-जब
तबबहुतशब्दहमनिगलतेहैं
यारतुमसाथरहपाओगी
हमतोकमरेबहुतबदलतेहैं
रातभरआतेख़्वाबजोसारे
सुब्हपैरोंतलेकुचलतेहैं
सुनोजबशराबहमपीलें
तबतोहमसिर्फ़सचउगलतेहैं
  - Anubhav Gurjar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy