ham sharaafat se bhi apni qahr ab dhaa hi rahe hain | हम शराफ़त से भी अपनी क़हर अब ढा ही रहे हैं

  - Anubhav Gurjar
हमशराफ़तसेभीअपनीक़हरअबढाहीरहेहैं
परतुम्हारीयादकेचक्करहमेंखाहीरहेहैं
अबनएकुछयारहमभीतोबनाबैठेयहाँपर
परजिन्हेंहमछोड़आएयादवोहीरहेहैं
ज़िन्दगीतूनेजानेकिसजगहलाकरउधेड़ा
सबहमेंमुर्दासमझयूँँनोंचकरखाहीरहेहैं
ग़ौरसेदेखोहमेंतुमयारकोईलाशहैंक्या
कोईटिकताहीनहींसबछोड़केजाहीरहेहैं
कबतलकऐसेजिएँगेराहकोईहैअपनी
राहमैंजबतकहैंतबतकगीतहमगाहीरहेहैं
रूहकाकोईसमर्पणभीकरेतबबातहोगी
येग़लतहैतोहैलेकिनजिस्महमपाहीरहेहैं
  - Anubhav Gurjar
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