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Ansar Ethvi
pahle se maaloom tha mujhko
pahle se maaloom tha mujhko | पहले से मालूम था मुझको
- Ansar Ethvi
पहले
से
मालूम
था
मुझको
तुम
भी
मेरे
हो
नहीं
सकते
- Ansar Ethvi
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वा'दा
कभी
न
अपना
निभाया
करेंगे
लोग
अब
मुश्किलों
में
काम
न
आया
करेंगे
लोग
सूरज
से
जिन
का
हो
न
कभी
कोई
इख़्तिलाफ़
तुम
सोचते
हो
धूप
में
साया
करेंगे
लोग
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Ansar Ethvi
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जो
भी
कहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
ज़िंदा
रहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
पीछे
चलने
से
तो
पहचान
सिमट
जाती
है
आगे
रहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
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Ansar Ethvi
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जहाँ
हर
शाम
पंछी
को
शजर
ही
याद
आता
है
मैं
दफ़्तर
से
निकलता
हूँ
तो
घर
ही
याद
आता
है
Ansar Ethvi
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यही
तो
ज़िद
हमारी
है
यहाँ
कुछ
कर
निकालेंगे
चराग़ों
के
दिमागों
से
हवा
का
डर
निकालेंगे
ज़माने
में
ख़ज़ाने
खोलकर
रखता
नहीं
कोई
परिंदे
जब
उड़ेंगे
तब
ही
अपने
पर
निकालेंगे
अली
से
हो
जिन्हें
चाहत
वही
क़ुर्बान
होते
हैं
यज़ीदी
सोच
हो
जिनकी
वही
ख़ंजर
निकालेंगे
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Ansar Ethvi
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सच्चाई
है
कि
ऐसे
भी
मंज़र
मिले
मुझे
जब
प्यास
मिट
गई
तो
समुंदर
मिले
मुझे
हाथों
को
जिनके
चूमा
हैं
अपना
जिसे
कहा
इक
दिन
उन्हीं
के
हाथों
में
ख़ंजर
मिले
मुझे
ठोकर
के
डर
से
उनको
हटाता
चला
गया
सबको
लगा
कि
क़ीमती
पत्थर
मिले
मुझे
पिछली
दफ़ा
में
पल
में
ही
नाकाम
हो
गए
फिर
इस
दफ़ा
में
सैकड़ों
लश्कर
मिले
मुझे
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Ansar Ethvi
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