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Anmol Mishra
ek ladki thii jise pagli kaha karta tha tu
ek ladki thii jise pagli kaha karta tha tu | एक लड़की थी जिसे पगली कहा करता था तू
- Anmol Mishra
एक
लड़की
थी
जिसे
पगली
कहा
करता
था
तू
एक
लड़की
याद
रख
बस
एक
पगली
भूल
जा
- Anmol Mishra
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अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
Salman Zafar
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दफ़्तर
तक
जाकर
के
वापस
लौटा
हूँ
गले
लगाना
भूल
गया
था
तुमको
मैं
Tanoj Dadhich
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अब
तो
हर
बात
याद
रहती
है
ग़ालिबन
मैं
किसी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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एक
मुद्दत
से
तिरी
याद
भी
आई
न
हमें
और
हम
भूल
गए
हों
तुझे
ऐसा
भी
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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रास्ता
भूल
के
आ
निकले
हैं
हम
तेरे
लोग
नहीं
थे
दुनिया
Ashraf Yousafi
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रोज़
मेरे
घर
की
जिम्मेदारियाँ
मुझ
को
आ
कर
भूल
जाने
का
तुझे
अब
मशवरा
दे
रही
हैं
Faiz Ahmad
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आओ
बैठो
मेरे
घर
में
सहते
ढहते
इस
खंडर
में
बाहर
आंँधी
बिजली
चमके
अंदर
आओ
इस
मंज़र
में
पीठ
हुई
क्यूँँंँ
गीली
मेरी
ख़ून
लगा
था
क्या
ख़ंजर
में
खोया
तुमने
प्यार
भरोसा
ढूंँढो
गुम
है
किस
जर्जर
में
तूने
जिस
सेे
प्रेम
किया
था
वो
तो
छूट
गया
नइहर
में
जोगी
धूल
उड़ाकर
बोला
माटी
डालो
इस
बंजर
में
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Anmol Mishra
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आज
जवानी
ठोकर
खाकर
गिरती
है
बूढ़े
कंधे
बोझ
उठाए
चलते
हैं
Anmol Mishra
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तुम्हें
वो
मिल
नहीं
पाईं
उन्हें
तुम
मिल
नहीं
पाए
कन्हैया
साथ
में
क्यूँ
फिर
सदा
तस्वीर
दिखती
है
Anmol Mishra
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ख़ामोशियाँ
ग़ुलाम
बनाती
हैं
शोर
को
शब
इश्क़
के
उसूल
सिखाती
चकोर
को
दिन
भर
तो
मेरे
यार
मेरे
यार
थे
बहुत
पर
शाम
को
गया
जो
वो
लौटा
न
भोर
को
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Anmol Mishra
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फटे
मुक़द्दर
पे
रख
के
खद्दर
हुई
सिकंदर
उदास
नस्लें
ज़मीन
फाड़ी
निचोड़े
बादल
बनाए
सागर
उदास
नस्लें
सुलगते
ख़्वाबों
की
राख
लेकर
गढ़े
थे
पुतले
जो
टेढ़े
मेढ़े
हँसी
के
मंतर
से
जान
फूँके
उन्हीं
के
अंदर
उदास
नस्लें
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Anmol Mishra
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