musalmaan ghaur kar kyun aaj teri | मुसलमाँ ग़ौर कर क्यूँँ आज तेरी

  - Anisa Haroon Sharwaniya
मुसलमाँग़ौरकरक्यूँँआजतेरी
वोपहलीआबरूबाक़ीनहींहै
मसाइबग़ैरकेपेश-ए-नज़रहैं
रगोंमेंवोलहूबाक़ीनहींहै
ग़ज़बहैभाईकादुश्मनहैभाई
उख़ुव्वतकीवोख़ूबाक़ीनहींहै
मसाइबग़ैरकैपेश-ए-नज़रहैं
ख़ुदअपनीजुस्तुजूबाक़ीनहींहै
कियापैरहन-ए-दींइसतरहचाक
किअबजा-ए-रफ़ूबाक़ीनहींहै
अनादिलक्यूँँहूँदिल-गीर-ओ-ख़ामोश
गुलोंमेंरंग-ओ-बूबाक़ीनहींहै
ज़बानोंपरतोहैअल्लाहअल्लाह
दिलोंमेंहाएतूबाक़ीनहींहै
  - Anisa Haroon Sharwaniya
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