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Aniket sagar
shaayaron ki zindagi mushkil badi hain
shaayaron ki zindagi mushkil badi hain | शायरों की ज़िंदगी मुश्किल बड़ी हैं
- Aniket sagar
शायरों
की
ज़िंदगी
मुश्किल
बड़ी
हैं
ग़म
कि
लगती
रोज़
ग़ज़लों
में
झड़ी
हैं
- Aniket sagar
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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मैं
कमाऊँ
शोहरतें
किसके
लिए
सागर
हाँ
जताने
को
कोई
होता
तो
होता
कुछ
Aniket sagar
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कभी
आसान
होती
है
कभी
मुश्किल
बड़ी
होती
कहाँ
होती
शुरू
किस
मोड़
पर
आकर
खड़ी
होती
यही
बस
ज़िंदगी
का
सार
समझोगे
तो
बेहतर
है
कभी
बरसात
सुख
की
है
कभी
ग़म
की
झड़ी
होती
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Aniket sagar
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प्रेम
का
जब
अर्थ
तुमको
जानना
हो
याद
कर
लो
कृष्ण-राधा
की
कहानी
Aniket sagar
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मेरी
संतान
से
मेरा
अलग
दुर्लभ
ही
नाता
है
उसे
इक
मैं
मुझे
इक
वो
हमेशा
से
ही
भाता
है
लिखूंँ
तो
काव्य
उसका
नाम
गाऊंँ
तो
तराना
है
वो
मुझ
सेे
ही
मुझे
हर
रोज़
आकर
के
मिलाता
है
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Aniket sagar
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कुछ
नज़्में
कुछ
ग़ज़लें
कह
जाऊँगा
फिर
दरिया
बन
कर
मैं
बह
जाऊँगा
Aniket sagar
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