firaq-e-yaar men kuchh kahiye samjhaaya nahin jaata | फ़िराक़-ए-यार में कुछ कहिए समझाया नहीं जाता

  - Anees Ahmad Anees
फ़िराक़-ए-यारमेंकुछकहिएसमझायानहींजाता
दिल-ए-वहशीकिसीसूरतसेबहलायानहींजाता
हमींनेचुनलिएफूलोंकेबदलेख़ारदामनमें
फ़क़तगुलचींकेसरइल्ज़ामठहरायानहींजाता
सर-ए-बाज़ाररुस्वाहोगएक्याहमकहतेथे
किसीसौदाईकेमुँहइसक़दरआयानहींजाता
गरेबाँथामलेंगेख़ारतोमुश्किलबहुतहोगी
गुलाबोंकीरविशपरइतनाइठलायानहींजाता
महकजाएगीमेरीख़ामुशीभीबू-ए-गुलहोकर
निदा-ए-हक़कोक़ैद-ओ-बंदमेंलायानहींजाता
उधरवोअहद-ओ-पैमान-ए-वफ़ाकीबातकरतेहैं
इधरमश्क़-ए-सितमभीतर्कफ़रमायानहींजाता
'अनीस'उट्ठोनईफ़िक्रोंसेराहेंज़ौ-फ़िशाँकरलो
मआ'ल-ए-लग़्ज़िश-ए-माज़ीपेपछतायानहींजाता
  - Anees Ahmad Anees
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