koi gar ashk bhi ponche to gham halka nahin hota | कोई गर अश्क भी पोंछे तो ग़म हल्का नहीं होता

  - Anas Nabeel
कोईगरअश्कभीपोंछेतोग़महल्कानहींहोता
घड़ीआगेबढ़ादेनेसेदिनछोटानहींहोता
पिलातीहैंकिसेअबदूधमाएँबा-वज़ूहोकर
तभीतोहममेंअबटीपूकोईपैदानहींहोता
गुनाहोंकीभयानकबर्फ़-बारीहमकोखाजाती
ख़ुदाकेरहमकासूरजअगरचमकानहींहोता
कहींभीजाकेबसजाएँवतनकीयादआतीहै
किसीसौतेलीमाँसेमुतमइनबेटानहींहोता
तिरीयादोंकेदरियामेंहरइकशबयेनहातीहैं
बदनग़ज़लोंकामेरीऐसेहीगोरानहींहोता
'नबील'इख़्लासबसदेहातकेलोगोंकाशेवाहै
किसीभीशहरकीमिट्टीमेंयेपौदानहींहोता
  - Anas Nabeel
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