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Ananya Rai Parashar
lagaake lab se apne jaam bhejo
lagaake lab se apne jaam bhejo | लगाके लब से अपने जाम भेजो
- Ananya Rai Parashar
लगाके
लब
से
अपने
जाम
भेजो
तड़पते
दिल
को
कुछ
आराम
भेजो
- Ananya Rai Parashar
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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बसेगा
ख़ास
कोई
इस
में
आख़िरी
दम
तक
बचाए
रक्खा
है
दिल
अपना
चाहतों
के
लिए
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Ananya Rai Parashar
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तुम
मुझे
इतना
आम
मत
समझो
हर
किसी
के
लिए
नहीं
हूँ
मैं
Ananya Rai Parashar
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दिल
किसी
से
भी
अगर
लगता
है
फिर
तो
दीवार
से
सर
लगता
है
एक
बस
तुमको
ही
चाहूँ
लेकिन
मुझको
इस
इश्क़
से
डर
लगता
है
तेरी
यादों
से
सजाती
हूँ
जब
मुस्कुराता
हुआ
घर
लगता
है
हम
सेफ़र
तू
जो
नहीं
है
मेरा
रूठा
रूठा
सा
सफ़र
लगता
है
मीठे
मीठे
से
ख़याल
आते
हैं
तेरी
बातों
का
असर
लगता
है
अब
नहीं
है
वो
'अनन्या'
तेरा
सच
नहीं
है
ये
मगर
लगता
है
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Ananya Rai Parashar
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जब
तलक
तेरा
इंतिज़ार
ना
था
दिल
मेरा
इतना
बेक़रार
ना
था
प्यार
था
रूठना
मनाना
था
सब
था
रिश्ते
में
पर
दरार
ना
था
मैं
जो
बेफ़िक्र
आसमाँ
में
थी
मुझपे
दुनिया
का
कुछ
उधार
ना
था
उसको
कुछ
और
तलब
थी
मुझ
सेे
उसपे
मेरा
ज़ुनून
सवार
ना
था
फूल
खिल
के
भी
मुस्कुराये
नहीं
कोई
मौसम
था
पर
बहार
ना
था
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Ananya Rai Parashar
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सजाए
रखना
है
इसको
तो
आख़िरी
दम
तक
मैं
अपने
बाग़
के
फूलों
में
देखती
हूँ
तुम्हें
Ananya Rai Parashar
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