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Ananya Rai Parashar
mere jeevan se khatm gham karte
mere jeevan se khatm gham karte | मेरे जीवन से ख़त्म ग़म करते
- Ananya Rai Parashar
मेरे
जीवन
से
ख़त्म
ग़म
करते
याद
करते
मुझे
करम
करते
तुम
ज़्यादा
नहीं
न
कम
करते
पर
मोहब्बत
मुझे
सनम
करते
गर
नवाज़िश
नहीं
सितम
करते
अपना
पल
पल
मेरे
बहम
करते
चूम
लेते
मेरे
लबों
को
तुम
हम
इनायत
तेरी
रक़म
करते
शब
गुज़रती
तुम्हारी
बाहों
में
तुम
कभी
सच
तो
ये
भरम
करते
तुम
मोहब्बत
हो
इश्क़
हो
मेरा
तुम
ये
कहते
तो
रश्क़
हम
करते
- Ananya Rai Parashar
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वफ़ाओं
के
बदले
जफ़ा
कर
रहे
हैं
मैं
क्या
कर
रहा
हूँ
वो
क्या
कर
रहे
हैं
Behzad Lakhnavi
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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ज़माना
ज़ुल्म
करता
है
ख़ुशी
से
कभी
तुझ
को
कभी
मुझ
को
सताए
Meem Alif Shaz
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गुनगुनाती
हूँ
मैं
इतराती
हूँ
उसको
देखूँ
तो
मैं
खिल
जाती
हूँ
मैं
दीवानी
नहीं
पागल
भी
नहीं
पर
तुझे
देख
के
शर्माती
हूँ
एक
बस
तेरी
मुहब्बत
के
लिए
सारी
दुनिया
से
मैं
लड़
जाती
हूँ
बे-ज़बानों
को
ज़बाँ
दी
मैने
फिर
भी
मैं
ख़ामोशी
कहलाती
हूँ
मुस्कुराती
हैं
चमन
में
कोयल
गीत
जब
इश्क़
के
मैं
गाती
हूँ
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Ananya Rai Parashar
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मेरी
निगाह
में
अक्सर
जो
तुम
सेे
बनता
है
बहुत
हसीं
है
वो
मंज़र
जो
तुम
सेे
बनता
है
Ananya Rai Parashar
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तुम्हें
रब
ने
बनाया
इक
कली
सा
और
उस
में
इत्र
की
ख़ुशबू
अता
की
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Ananya Rai Parashar
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ग़म
भुलाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
मुस्कुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
अपनी
तहज़ीब
है
रिवायत
है
हम
ज़माने
की
बात
क्यूँ
न
करें
क्या
ये
शिकवे
ज़ुबां
पे
रखते
हैं
दिल
चुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बैठकर
साथ
हम
बुजुर्गों
के
घर
घराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
वो
जो
मरता
है
मेरी
बातों
पे
उस
दीवाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बात
क्यूँ
कर
हो
आंधियों
की
भला
आशियाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
इतनी
ख़ामोशियां
भी
अच्छी
नहीं
गुनगुनाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
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Ananya Rai Parashar
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यूँँ
किसी
की
अता
नहीं
है
ये
अपनी
हस्ती
बनाई
है
मैंने
Ananya Rai Parashar
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