jahaan ko abhii taab-e-ulfat nahin hai | जहाँ को अभी ताब-ए-उल्फ़त नहीं है

  - Anand Narayan Mulla
जहाँकोअभीताब-ए-उल्फ़तनहींहै
बशरमेंअभीआदमियतनहींहै
तकल्लुफ़अगरहैहक़ीक़तनहींहै
तसन्नोज़बान-ए-मोहब्बतनहींहै
ज़रूरीहोजिसकेलिएएकदोज़ख़
वोमेरेतसव्वुरकीजन्नतनहींहै
मिरेदिलमेंइकतोहैतुझसेहसीं-तर
मुझेअबतिरीकुछज़रूरतनहींहै
मोहब्बतयक़ीननखिलाफ-ए-ख़िरदहै
मगरअक़्लहीइकहक़ीक़तनहींहै
उसेएकबेताबी-ए-शौक़समझो
तग़ाफ़ुलकाशिकवाशिकायतनहींहै
मुझेकरकेचुपकोईकहताहैहँसकर
उन्हेंबातकरनेकीआदतनहींहै
कभीहोसकेगा'मुल्ला'काईमाँ
जिसईमाँमेंदिलकीनबुव्वतनहींहै
  - Anand Narayan Mulla
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