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Amrit Lal Ishrat
qadam qadam pe ha
qadam qadam pe ha | क़दम क़दम पे हमें रंग-ओ-बू का धोका है
- Amrit Lal Ishrat
क़दम
क़दम
पे
हमें
रंग-ओ-बू
का
धोका
है
ख़िज़ाँ-नसीब
रफ़ीक़ो
ये
दौर
कैसा
है
जो
तू
कहे
उसे
छू
कर
ज़रा
यक़ीं
कर
लूँ
तिरी
जबीं
पे
मुझे
चाँदनी
का
धोका
है
मिरी
निगाह
ने
बख़्शी
है
हुस्न
को
रौनक़
नसीम-ए-सुब्ह
से
फूलों
का
रंग
बिखरा
है
बिना-ए-शे'र
है
मेरा
मुशाहिदा
'इशरत'
मिरे
कलाम
में
हर
दिल
का
दर्द
होता
है
- Amrit Lal Ishrat
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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किसी
सीने
पे
आहट
दी,
किसी
काँधे
पे
सर
रक्खा
हुए
कितने
भी
बेपरवाह
मगर
बस
एक
घर
रक्खा
Prashant Beybaar
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'अख़्तर'
गुज़रते
लम्हों
की
आहट
पे
यूँँ
न
चौंक
इस
मातमी
जुलूस
में
इक
ज़िंदगी
भी
है
Akhtar Hoshiyarpuri
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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अच्छा
ख़्वाब
दिखाया
तुमने
ख़्वाब
दिखाने
वालों
में
ऐसी
बात
कहाँ
होती
थी
इस
सेे
पहले
वालों
में
दरवाज़े
पर
ताला
हो
तो
फिर
भी
दस्तक
दे
देना
नाम
तो
शामिल
हो
जाएगा
दस्तक
देने
वालों
में
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Aman Shahzadi
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दीवारों
पर
दस्तक
देते
रहिएगा
दीवारों
में
दरवाज़े
बन
जाएँगे
Kunwar Bechain
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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मैं
उस
सेे
दूर
था
तो
शोर
था
साजिश
है,
साजिश
है
उसे
बाहों
में
खुलकर
कस
लिया
दो
पल
तो
हंगामा
Kumar Vishwas
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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उदास
दिल
है
कि
उन
की
नज़र
नहीं
होती
बग़ैर
शम्स
के
ताब-ए-क़मर
नहीं
होती
कुछ
ऐसे
लोग
भी
दुनिया
में
हम
ने
देखे
हैं
समा
भी
जाते
हैं
दिल
में
ख़बर
नहीं
होती
उठो
तो
दस्त-ब-साग़र
चलो
तो
शीशा-ब-दोश
ये
मय-कदा
है
यहाँ
यूँँ
गुज़र
नहीं
होती
कभी
कभी
मुझे
उन
का
ख़याल
आता
है
कभी
कभी
मुझे
अपनी
ख़बर
नहीं
होती
शब-ए-हयात
है
साग़र
में
डूब
जा
'इशरत'
ये
ऐसी
रात
है
जिस
की
सहर
नहीं
होती
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Amrit Lal Ishrat
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