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Daqiiq Jabaali
ye zindagi kuchh is tarah se paas mere aayi hai
ye zindagi kuchh is tarah se paas mere aayi hai | ये ज़िन्दगी कुछ इस तरह से पास मेरे आई है
- Daqiiq Jabaali
ये
ज़िन्दगी
कुछ
इस
तरह
से
पास
मेरे
आई
है
अब
तो
अमित
केवल
यहाँ
तन्हाई
ही
तन्हाई
है
- Daqiiq Jabaali
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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शौक़
उसको
भी
है
यारों
शा'इरी
का
बस
यूँँ
ही
थोड़ी
न
लिखता
रहता
हूँ
मैं
Daqiiq Jabaali
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हमनें
दुनिया
को
परखा
तो
ये
जाना
सबके
अंदर
इक
रावण
होता
ही
है
Daqiiq Jabaali
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अब
तो
खु़द
के
ऊपर
गै़रत
सी
होती
है
इक
टाइम
था
सचमुच
तेरे
क़ाबिल
था
मैं
Daqiiq Jabaali
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हम
ज़िन्दगी
में
अपनी
फिर
से
रंग
भर
पाए
नहीं
उस
के
अलावा
दूसरे
से
इश्क़
कर
पाए
नहीं
Daqiiq Jabaali
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कभी
घर
पर
कभी
बाहर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
ज़ियादा
तो
नहीं
दिनभर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
तुम्हारी
बातें
कर-कर
के
ही
तो
मैं
बन
गया
शायर
मैं
शायर
हूँ
सो
मैं
अक्सर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
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Daqiiq Jabaali
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