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Daqiiq Jabaali
ye zabardasti ka rishta to nahin rakhna kisi se
ye zabardasti ka rishta to nahin rakhna kisi se | ये ज़बरदस्ती का रिश्ता तो नहीं रखना किसी से
- Daqiiq Jabaali
ये
ज़बरदस्ती
का
रिश्ता
तो
नहीं
रखना
किसी
से
जिसको
जाना
है
अगर
वो
फिर
चला
जाए
ख़ुशी
से
दोस्तों
पर
था
किया
मैंने
भरोसा
सब
सेे
ज़्यादा
और
अब
मेरा
भरोसा
उठ
रहा
है
दोस्ती
से
- Daqiiq Jabaali
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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जहाँ
तक
मुझ
सेे
मतलब
है
जहाँ
को
वही
तक
मुझको
पूछा
जा
रहा
है
ज़माने
पर
भरोसा
करने
वालों
भरोसे
का
ज़माना
जा
रहा
है
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Naeem Akhtar Khadimi
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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ये
दिल
मलूल
भी
कम
है
उदास
भी
कम
है
कई
दिनों
से
कोई
आस
पास
भी
कम
है
हमें
भी
यूँं
ही
गुजरना
पसंद
है
और
फिर
तुम्हारा
शहर
मुसाफ़िर-शनास
भी
कम
है
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Farhat Abbas Shah
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जान
तुझ
पर
कुछ
ए'तिमाद
नहीं
ज़िंदगानी
का
क्या
भरोसा
है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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हम
घूम
चुके
बस्ती
बन
में
इक
आस
की
फाँस
लिए
मन
में
Ibn E Insha
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है
दुख
तो
कह
दो
किसी
पेड़
से
परिंदे
से
अब
आदमी
का
भरोसा
नहीं
है
प्यारे
कोई
Madan Mohan Danish
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हम
आज
राह-ए-तमन्ना
में
जी
को
हार
आए
न
दर्द-ओ-ग़म
का
भरोसा
रहा
न
दुनिया
का
Waheed Quraishi
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अज़ल
से
मेरी
हिफ़ाज़त
का
फ़र्ज़
है
उन
पर
सभी
दुखों
को
मेरे
आस-पास
होना
है
Rahul Jha
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मैं
ख़ुशी
में
तेरी
हँसता
तेरे
दुख
में
रोता
मैं
काश
ऐसा
होता
मेरी
जान
शीशा
होता
मैं
Daqiiq Jabaali
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ये
मेरा
चेहरा
तो
फिर
भी
हँस
ही
लेता
है
मगर
मेरे
दिल
को
मुस्कुराये
तो
ज़माना
हो
गया
Daqiiq Jabaali
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ये
सारे
मर्द
इक
जैसे
नहीं
होते
मैं
सच
कहता
हूँ
तुम
मुझ
सेे
भी
बेहतर
हो
Daqiiq Jabaali
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कौन
से
ग़म
ने
तुझे
अंदर
से
खा
डाला
तेरा
चेहरा
इतना
मुरझा
क्यूँँ
गया
है
अब
Daqiiq Jabaali
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ये
शा'इरी
तब
तक
ही
अच्छी
थी
अमित
जब
पास
में
तेरे
वो
लड़की
थी
अमित
वो
पास
थी
मेरे
तो
ख़ुश
था
मैं
बहुत
वो
जब
नहीं
थी
तो
उदासी
थी
अमित
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Daqiiq Jabaali
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