hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Daqiiq Jabaali
vo samajhte nahin hain sirf maza lete hain
vo samajhte nahin hain sirf maza lete hain | वो समझते नहीं हैं सिर्फ़ मज़ा लेते हैं
- Daqiiq Jabaali
वो
समझते
नहीं
हैं
सिर्फ़
मज़ा
लेते
हैं
क़ल्ब
की
बात
रफ़ीक़ों
से
बताएँ
कैसे
- Daqiiq Jabaali
Download Sher Image
वो
तो
क़हहार
हो
के
बैठे
हैं
हम
परस्तार
हो
के
बैठे
हैं
रास्ते
तुमको
पाने
के
सारे
जान
दुश्वार
हो
के
बैठे
हैं
आप
आए
जो
मेरे
गुलशन
में
गुल
महक-दार
हो
के
बैठे
हैं
वो
ख़फ़ा
होगा
हमने
सोचा
था
तंज़
बेकार
हो
के
बैठे
हैं
रात-दिन
बस
तेरे
ख़यालों
में
हम
गिरफ़्तार
हो
के
बैठे
हैं
नोचने
जिस्म
एक
तितली
का
साँप
तैयार
हो
के
बैठे
हैं
दुनिया
तो
खै़र
ठीक
है
लेकिन
दोस्त
दीवार
हो
के
बैठे
हैं
मुझको
हथियार
की
ज़रूरत
क्या?
लफ्ज़
तलवार
हो
के
बैठे
हैं
कोई
अहद-ए-वफा़
करो
हम
सेे
हम
वफ़ादार
हो
के
बैठे
हैं
बात
करने
को
दिल
नहीं
करता
इतने
बेज़ार
हो
के
बैठे
हैं
उम्र
नादानी
करने
की
है
'अमित'
हम
समझदार
हो
के
बैठे
हैं
Read Full
Daqiiq Jabaali
Download Image
2 Likes
इस
उदासी
से
सन
गए
हम
लोग
और
पत्थर
के
बन
गए
हम
लोग
Daqiiq Jabaali
Send
Download Image
0 Likes
कौन
सा
ग़म
नहीं
दिया
फिर
भी
ज़िन्दगी
तेरा
शुक्रिया
फिर
भी
Daqiiq Jabaali
Send
Download Image
2 Likes
ये
सारे
मर्द
इक
जैसे
नहीं
होते
मैं
सच
कहता
हूँ
तुम
मुझ
सेे
भी
बेहतर
हो
Daqiiq Jabaali
Send
Download Image
0 Likes
साथ
उसके
एक
फोटो
चाहिए
यारों
मुझे
तो
यार
लेकिन
वो
मना
कर
देगी
तो
मैं
क्या
करूँँगा
Daqiiq Jabaali
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Dost Shayari
Tanhai Shayari
Education Shayari
Visaal Shayari
Nafrat Shayari