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Daqiiq Jabaali
roz mere saamne aati rahi ho tum
roz mere saamne aati rahi ho tum | रोज़ मेरे सामने आती रही हो तुम
- Daqiiq Jabaali
रोज़
मेरे
सामने
आती
रही
हो
तुम
रोज़
कुछ
भी
तो
नहीं
कह
पाया
मैं
तुम
सेे
- Daqiiq Jabaali
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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कि
दुनिया
भर
की
बातें
बोल
दी
उसको
जो
कहना
चाहिए
था
वो
तो
बोला
नइँ
Daqiiq Jabaali
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मैं
जब
भी
पूछता
हूँ
उस
सेे
तो
इंकार
करती
है
हक़ीक़त
में
वो
यारों
बस
मुझी
से
प्यार
करती
है
Daqiiq Jabaali
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काश
ऐसा
हो
मनाओ
यार
मुझको
तुम
सीने
से
अपने
लगाओ
यार
मुझको
तुम
मैं
सुना
देता
हूँ
तुम
को
शा'इरी
अपनी
हाल
फिर
अपना
सुनाओ
यार
मुझको
तुम
आप
से
बेहतर
जहाँ
इंसान
रहते
हैं
ऐसी
दुनिया
मत
दिखाओ
यार
मुझको
तुम
दोस्तों
को
अपने
मुझको
भी
जलाना
है
अपनी
डीपी
में
लगाओ
यार
मुझको
तुम
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Daqiiq Jabaali
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ये
ज़बरदस्ती
का
रिश्ता
तो
नहीं
रखना
किसी
से
जिसको
जाना
है
अगर
वो
फिर
चला
जाए
ख़ुशी
से
दोस्तों
पर
था
किया
मैंने
भरोसा
सब
सेे
ज़्यादा
और
अब
मेरा
भरोसा
उठ
रहा
है
दोस्ती
से
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Daqiiq Jabaali
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आख़िरश
क्यूँ
करें
ज़ाईदा
नया
तिफ़्ल
'अमित'
इस
सेे
बढ़िया
है
पिदर-मुर्दा
उठा
लाएँ
कोई
Daqiiq Jabaali
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