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Daqiiq Jabaali
pahle jaisi sukoon kii raat nahin hoti hai
pahle jaisi sukoon kii raat nahin hoti hai | पहले जैसी सुकूँ की रात नहीं होती है
- Daqiiq Jabaali
पहले
जैसी
सुकूँ
की
रात
नहीं
होती
है
मेरी
अब
उन
सेे
कोई
बात
नहीं
होती
है
दोस्त
जिनसे
कि
मैं
हर
रोज़
मिला
करता
था
अब
कई
हफ़्तों
मुलाक़ात
नहीं
होती
है
- Daqiiq Jabaali
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पकड़
में
आती
नहीं
है
कभी
वो
शाख़-ए-विसाल
हम
एक
बोस-ए-गुल
के
लिए
तरसते
हैं
Subhan Asad
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वस्ल
का
दिन
और
इतना
मुख़्तसर
दिन
गिने
जाते
थे
इस
दिन
के
लिए
Ameer Minai
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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आज
मिलना
था
बिछड़
जाने
की
नीयत
से
हमें
आज
भी
वो
देर
से
पहुँचा
है
कितना
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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इक
बे-क़रार
दिल
से
मुलाक़ात
कीजिए
जब
मिल
गए
हैं
आप
तो
कुछ
बात
कीजिए
Naushad Ali
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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बात
से
बात
बनेगी
तू
कभी
बात
तो
कर
आ
ज़रा
पास
मिरे
यार
मुलाक़ात
तो
कर
पूछ
तू
भी
तो
कभी
हाल
हमारे
दिल
का
हाल
से
हाल
मिलाने
की
शुरूआत
तो
कर
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shaan manral
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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नहीं
पड़ा
हमें
ज़रा
भी
फ़र्क़
उसके
जाने
से
उदास
पहले
भी
थे
हम,उदास
अब
भी
रहते
हैं
Daqiiq Jabaali
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अच्छी
सूरत
वाले
पत्थर
दिल
के
होते
हैं
सभी
तुमने
धोखा
देके
अब
ये
बात
पक्की
कर
दी
है
Daqiiq Jabaali
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शे'रों
को
जनरेट
करना
पड़ता
है
ग़ज़लों
को
अपडेट
करना
पड़ता
है
उसका
इक
रिप्लाई
पाने
के
लिए
मुझको
घंटों
वेट
करना
पड़ता
है
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Daqiiq Jabaali
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दर्द
है
ग़म
है
उदासी
भी
है
तन्हाई
भी
साल
बदला
है
मगर
हाल
नहीं
बदला
है
Daqiiq Jabaali
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तुम
लोगों
के
ख़ातिर
वो
इक
लड़की
हो
सकती
है
मेरे
लिए
तो
पूरी
दुनिया
है
वो
इक
लड़की
Daqiiq Jabaali
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