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Daqiiq Jabaali
kyun karen ham ishq men chaalaaki yaaron
kyun karen ham ishq men chaalaaki yaaron | क्यूँँ करें हम इश्क़ में चालाकी यारों
- Daqiiq Jabaali
क्यूँँ
करें
हम
इश्क़
में
चालाकी
यारों
सादगी
से
जीत
लेंगे
उनका
दिल
हम
- Daqiiq Jabaali
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बाद
में
तुम
से
इश्क़
कर
लेंगे
पहले
ख़ुदस
तो
प्यार
कर
लें
हम
Shadab Asghar
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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इश्क़
में
ये
दावा
तो
नईं
है
मैं
ही
अव्वल
आऊँगा
लेकिन
इतना
कह
सकता
हूँ
अच्छे
नंबर
लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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एक
तरफ़ा
किया
है
इश्क़
अमित
तुम
ने
तो
सो
उसे
बे-वफ़ा
कहकर
के
बुलाएँ
कैसे
Daqiiq Jabaali
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एक
बेटी
दे
देना
मुझे
तू
ख़ुदा
और
कोई
तमन्ना
नहीं
है
मेरी
Daqiiq Jabaali
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इस
उदासी
से
सन
गए
हम
लोग
और
पत्थर
के
बन
गए
हम
लोग
Daqiiq Jabaali
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जब
कभी
ग़म
ने
सताया
देर
तक
मैंने
फिर
ग़ज़लों
को
गाया
देर
तक
यार
से
अपने
मैं
जब
जब
भी
मिला
सीने
से
उस
को
लगाया
देर
तक
हार
कर
भी
जब
मैं
यारों
हँस
पड़ा
दुश्मनों
ने
ग़म
मनाया
देर
तक
खौफ़
से
दुनिया
के
मैं
जब
भी
डरा
हौसला
माँ
ने
बढ़ाया
देर
तक
झूठ
कितना
भी
कहा
उसने
मगर
सच
तो
लेकिन
छुप
न
पाया
देर
तक
हाथ
ख़ुशियों
ने
कभी
पकड़ा
नहीं
साथ
तो
ग़म
ने
निभाया
देर
तक
माफ़
तुझको
मैं
भला
कैसे
करुँ
तूँ
ने
भी
तो
दिल
दुखाया
देर
तक
शा'इरी
ने
जिस
किसी
को
भी
चुना
नौकरी
वो
कर
न
पाया
देर
तक
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Daqiiq Jabaali
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इन
को
खोना
तो
बहुत
सोच
समझकर
खोना
नेक
दिल
लोग
तो
मिलते
हैं
बहुत
मुश्किल
से
Daqiiq Jabaali
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