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Daqiiq Jabaali
kaun kahtaa hai ye tujh se baat ghanto tak kiya kar
kaun kahtaa hai ye tujh se baat ghanto tak kiya kar | कौन कहता है ये तुझ से बात घंटो तक किया कर
- Daqiiq Jabaali
कौन
कहता
है
ये
तुझ
से
बात
घंटो
तक
किया
कर
पल
दो
पल
ही
कर
मगर
ऐ
जान
तू
कर
तो
लिया
कर
- Daqiiq Jabaali
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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इक
लड़की
से
बात
करो
तो
लगता
है
इस
दुनिया
को
छोड़
के
भी
इक
दुनिया
है
Shadab Asghar
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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न
उसने
हाथ
लगाया
न
उसने
बातें
कीं
पड़े
पड़े
यूँँ
ही
ख़ुद
में
ख़राब
हो
गए
हम
Abhishek shukla
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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न
जाने
लोग
फिर
कैसे
मियाँ
बर्बाद
होते
हैं
मुझे
तो
इस
मुहब्बत
ने
‘अमित’
शायर
बनाया
है
Daqiiq Jabaali
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तेरी
खु़शियाँ
ज़ियादा
ही
ज़रूरी
हैं
मैं
अक्सर
इस
वजह
से
हार
जाता
हूँ
Daqiiq Jabaali
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देर
तक
फिर
मैं
सुकूँ
की
नींद
सोता
काश
तुमने
हाथ
मेरा
थामा
होता
मैं
तुझे
फिर
अपनी
ग़ज़लों
में
पिरोता
काश
तुझको
बस
अमित
से
इश्क़
होता
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Daqiiq Jabaali
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तुम
कुछ
भी
कहते
रहते
हो
तुम
भी
औरों
के
जैसे
हो
Daqiiq Jabaali
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वो
तो
क़हहार
हो
के
बैठे
हैं
हम
परस्तार
हो
के
बैठे
हैं
रास्ते
तुमको
पाने
के
सारे
जान
दुश्वार
हो
के
बैठे
हैं
आप
आए
जो
मेरे
गुलशन
में
गुल
महक-दार
हो
के
बैठे
हैं
वो
ख़फ़ा
होगा
हमने
सोचा
था
तंज़
बेकार
हो
के
बैठे
हैं
रात-दिन
बस
तेरे
ख़यालों
में
हम
गिरफ़्तार
हो
के
बैठे
हैं
नोचने
जिस्म
एक
तितली
का
साँप
तैयार
हो
के
बैठे
हैं
दुनिया
तो
खै़र
ठीक
है
लेकिन
दोस्त
दीवार
हो
के
बैठे
हैं
मुझको
हथियार
की
ज़रूरत
क्या?
लफ्ज़
तलवार
हो
के
बैठे
हैं
कोई
अहद-ए-वफा़
करो
हम
सेे
हम
वफ़ादार
हो
के
बैठे
हैं
बात
करने
को
दिल
नहीं
करता
इतने
बेज़ार
हो
के
बैठे
हैं
उम्र
नादानी
करने
की
है
'अमित'
हम
समझदार
हो
के
बैठे
हैं
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Daqiiq Jabaali
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