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Daqiiq Jabaali
beete lamhon ke saath baitha hooñ
beete lamhon ke saath baitha hooñ | बीते लम्हों के साथ बैठा हूँ
- Daqiiq Jabaali
बीते
लम्हों
के
साथ
बैठा
हूँ
तेरी
यादों
के
साथ
बैठा
हूँ
चाय
गाने
किताब
तन्हाई
अपने
यारों
के
साथ
बैठा
हूँ
- Daqiiq Jabaali
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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बारूद
के
बदले
हाथों
में
आ
जाए
किताब
तो
अच्छा
हो
ऐ
काश
हमारी
आँखों
का
इक्कीसवाँ
ख़्वाब
तो
अच्छा
हो
Ghulam Mohammad Qasir
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ये
इल्म
का
सौदा
ये
रिसाले
ये
किताबें
इक
शख़्स
की
यादों
को
भुलाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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ये
हुनर
जो
आ
जाए,
आपका
ज़माना
है
पाँव
किसके
छूने
हैं,
सर
कहाँ
झुकाना
है
Astitwa Ankur
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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तुम
जब
भी
हँसती
हो
बारिश
सी
लगती
हो
इतना
क्यूँँ
सजती
हो,
सादा
ही
अच्छी
हो
Daqiiq Jabaali
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दोस्ती
सिर्फ़
दो
चार
से
है
मेरी
बाकी
सब
तो
फ़क़त
नाम
के
दोस्त
हैं
Daqiiq Jabaali
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सारी
दुनिया
का
भला
मैं
क्या
करूँँगा
मुझको
तो
वो
एक
लड़की
चाहिए
बस
Daqiiq Jabaali
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एक
तरफ़ा
किया
है
इश्क़
अमित
तुम
ने
तो
सो
उसे
बे-वफ़ा
कहकर
के
बुलाएँ
कैसे
Daqiiq Jabaali
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बात
ये
है
अब
शिकायत
ही
नहीं
मुझको
किसी
से
मुझको
तो
मालूम
पड़ता
है
मैं
शायद
मर
चुका
हूँ
Daqiiq Jabaali
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