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Amit Kumar
usne kabhi bhi dil lagaaya hi nahin
usne kabhi bhi dil lagaaya hi nahin | उसने कभी भी दिल लगाया ही नहीं
- Amit Kumar
उसने
कभी
भी
दिल
लगाया
ही
नहीं
लगता
है
फिर
भी
वो
पराया
ही
नहीं
उसने
कहा
था
साथ
पाओगे
मुझे
ख़ुद
को
खो
दोगे
ये
बताया
ही
नहीं
मैंने
उसे
अपना
बनाया
था
'अमित'
जिसने
मुझे
अपना
बनाया
ही
नहीं
- Amit Kumar
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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खटती
है
दिन
भर
एक
रोटी
के
लिए
माँ
और
क्या
ही
करती
बच्ची
के
लिए
आख़िर
में
हम
को
भी
बिछड़ना
ही
पड़ा
उन
थोड़े
से
लोगों
की
बस्ती
के
लिए
जब
देखा
मैंने
सूखते
पेड़ों
को
कुछ
उन
में
लगा
दी
आग
पानी
के
लिए
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Amit Kumar
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पूनम
का
ये
चाँद
तुम
जैसे
के
लिए
है
बना
हम
जैसे
के
वास्ते
बस
नींद
की
गोली
बनी
Amit Kumar
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मेरे
अंदर
जब
तलक
ये
दिल
नहीं
था
भूलना
मेरे
लिए
मुुश्किल
नहीं
था
उसको
महबूबास
ज़्यादा
चाहा
मैंने
दोस्ती
भर
के
भी
जो
क़ाबिल
नहीं
था
उम्र
भर
आते
रहे
हैं
ख़्वाब
उसके
ज़िंदगी
में
जो
मुझे
हासिल
नहीं
था
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Amit Kumar
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पहले
तो
ज़िंदगी
इक
हताशा
लगी
सोचा
समझा
तो
महँगी
असासा
लगी
तब
कहीं
लोगों
ने
जानवर
पाले
जब
उनको
इंसानियत
एक
झाँसा
लगी
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Amit Kumar
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पहले
ज़िंदगी
के
तुम
अजाब
देखो
फिर
गर
चाहो
तो
इसके
ख़िताब
देखो
Amit Kumar
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