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Amit Kumar
kya hai ye ishq koi bataaye mujhe
kya hai ye ishq koi bataaye mujhe | क्या है ये इश्क़ कोई बताए मुझे
- Amit Kumar
क्या
है
ये
इश्क़
कोई
बताए
मुझे
भूलता
ही
नहीं
वो
भुलाए
मुझे
उसने
बस
बालों
पे
हाथ
फेरा
है
बस
हो
गए
है
कई
दिन
नहाए
मुझे
नींद
टूटे
न
जब
तक
वो
सपने
में
है
चाहे
चिल्ला
के
कोई
बुलाए
मुझे
सोचता
हूँ
घड़ी
मैं
बनाऊँ
कभी
जो
समय
रहते
सब
कुछ
बताए
मुझे
- Amit Kumar
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खुलती
है
मेरी
नींद
हर
इक
रात
दो
बजे
इक
रात
दो
बजे
मुझे
छोड़ा
था
आपने
Tanoj Dadhich
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बदनज़र
उठने
ही
वाली
थी
किसी
की
जानिब
अपने
बेटी
का
ख़याल
आया
तो
दिल
काँप
गया
Nawaz Deobandi
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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ख़याल
में
भी
उसे
बे-रिदा
नहीं
किया
है
ये
ज़ुल्म
मुझ
सेे
नहीं
हो
सका
नहीं
किया
है
Ali Zaryoun
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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रात
भी
नींद
भी
कहानी
भी
हाए
क्या
चीज़
है
जवानी
भी
Firaq Gorakhpuri
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बेचैन
फिरता
हूँ
मैं
अक्सर
ख़्वाब
में
होती
नहीं
आबाद
मेरी
नींद
भी
Piyush Mishra 'Aab'
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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ये
मुझे
नींद
में
चलने
की
जो
बीमारी
है
मुझ
को
इक
ख़्वाब-सरा
अपनी
तरफ़
खींचती
है
Shahid Zaki
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अच्छे
ख़ासे
उदासी
में
बैठे
थे
हम
कैमरा
देख
के
हम
को
हँसना
पड़ा
Amit Kumar
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मेरे
इस
दिल
को
आराम
आ
जाता
है
जो
कहीं
पे
तिरा
नाम
आ
जाता
है
अब
कहाँ
याद
करता
है
कोई
किसे
शुक्र
ये
है
कुई
काम
आ
जाता
है
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Amit Kumar
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हार
जाते
हैं
जो
अपनी
ज़िन्दगी
में
होश
की
करते
हैं
बातें
मय-कशी
में
काम
करना
पड़ता
है
बीमारी
में
भी
ज़िन्दगी
लगती
है
सस्ती
मुफ़लिसी
में
कोई
ऐसा
कर
गया
कुछ
साथ
मेरे
घुल
के
आ
जाते
हैं
आँसू
अब
हँसी
में
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Amit Kumar
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रोना
था
सो
हँसी
मार
दी
पानी
ने
ख़ुद
नमी
मार
दी
मर
गए
लोग
कुछ
मौत
से
कुछ
को
तो
ज़िंदगी
मार
दी
उम्र
भर
वेट
करते
तिरा
हम
को
बस
ये
घड़ी
मार
दी
हम
नहीं
मरते
बीमारी
से
बस
दवा
की
कमी
मार
दी
इतना
जीवन
अँधेरे
में
था
हम
को
इक
रौशनी
मार
दी
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Amit Kumar
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ये
सुना
है
भली
मुहब्बत
है
फिर
गले
क्यूँ
पड़ी
मुहब्बत
है
होती
कब
की
अलग-थलग
दुनिया
है
ग़नीमत
अभी
मुहब्बत
है
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Amit Kumar
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