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Amit Kumar
isliye man bhi khudkushi ka tha
isliye man bhi khudkushi ka tha | इसलिए मन भी ख़ुद-कुशी का था
- Amit Kumar
इसलिए
मन
भी
ख़ुद-कुशी
का
था
मसअला
अबकी
ज़िंदगी
का
था
रह
गया
देखो
कितना
तन्हा
अब
शख़्स
वो
ही
जो
हर
किसी
का
था
कोई
बेबस
उदास
कोई
कुछ
हाल
ऐसा
यहाँ
सभी
का
था
वो
मिरा
हो
के
क्या
ही
कर
लेता
ख़ुद
से
ज़्यादा
मैं
तो
उसी
का
था
मैंने
ये
सोच
के
तसल्ली
की
खेल
तो
सारा
कुंडली
का
था
- Amit Kumar
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जब
से
छेड़ा
है
मेरे
ज़ख़्मों
को
आ
रही
मौत
की
सदा
मुझको
Rachit Sonkar
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अपनी
नज़रों
में
गिर
चुका
हूँ
मैं
ये
तरीक़ा
भी
ख़ुद-कुशी
का
था
Bhavesh Pathak
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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ज़िंदगी
दूर
ही
हमें
कर
दे
मौत
के
बाद
वस्ल
मुमकिन
है
Akash Panwar
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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राम
के
हाथों
मौत
लिखी
थी
रावण
की
वरना
तो
बजरंगबली
ही
काफ़ी
थे
Sanskar 'Sanam'
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पहले
तो
ज़िंदगी
इक
हताशा
लगी
सोचा
समझा
तो
महँगी
असासा
लगी
तब
कहीं
लोगों
ने
जानवर
पाले
जब
उनको
इंसानियत
एक
झाँसा
लगी
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Amit Kumar
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मेरे
अंदर
जब
तलक
ये
दिल
नहीं
था
भूलना
मेरे
लिए
मुुश्किल
नहीं
था
उसको
महबूबास
ज़्यादा
चाहा
मैंने
दोस्ती
भर
के
भी
जो
क़ाबिल
नहीं
था
उम्र
भर
आते
रहे
हैं
ख़्वाब
उसके
ज़िंदगी
में
जो
मुझे
हासिल
नहीं
था
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Amit Kumar
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फूल
हिस्से
के
मेरे
खिले
ही
नहीं
इसलिए
काँटो
से
अब
गिले
ही
नहीं
उसका
मिलने
को
इक
फ़ोन
आया
मुझे
उसके
पश्चात
हम
फिर
मिले
ही
नहीं
ज़िंदगी
ऐसे
इक
मोड़
पर
थी
खड़ी
आई
हिम्मत
मगर
हम
हिले
ही
नहीं
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Amit Kumar
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है
पता
दुनिया
ये
अब
अच्छी
नहीं
है
हाँ
मगर
दुनिया
की
ये
मर्ज़ी
नहीं
है
खोज
लेती
हैं
बदल
कोई
न
कोई
ख़्वाहिशें
तन्हा
कभी
मरती
नहीं
है
उस
को
कर
के
याद
कहता
हूँ
ग़ज़ल
अब
जिस
से
मिलने
में
भी
दिलचस्पी
नहीं
है
दिखती
तो
है
उसकी
आँखों
में
मुहब्बत
एक
वो
आवाज़
कुछ
कहती
नहीं
है
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Amit Kumar
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पूनम
का
ये
चाँद
तुम
जैसे
के
लिए
है
बना
हम
जैसे
के
वास्ते
बस
नींद
की
गोली
बनी
Amit Kumar
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