बस्ती उजड़ गई कहाँ वो अब मकाँ रहे

  - Amit Gautam
बस्तीउजड़गईकहाँवोअबमकाँरहे
इंसानियतजोसमझेवोइंसांकहाँरहे
वोएकसानेहाअभीभीयादरहगया
बाक़ीफ़सानेकेकोईअबनिशाँरहे
फलफूलतेहैंलोगयहाँबेचनफ़रतें
नफ़रतमेंमेरीउल्फ़तोंकीइकदुकाँरहे
शीरींज़बानबोलतेहैंलोगसामने
दिलदेखिएतोज़हरहीउस
मेंनिहाँरहे
तन्हासेरास्तोंमेंअगरसाथआपहों
मेरेलिएतोबसयेहीइककारवाँरहे
हमढूँढतेतुम्हेंथेज़मींऔरआसमाँ
इतनेबरसबताओज़रातुमकहाँरहे
कितनाभीमैंसँवारूॅंमगरबातजानलो
तुमबिनतोज़िंदगीकेयेपलराएगाँरहे
  - Amit Gautam
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