subh tak main sochta hooñ shaam se | सुब्ह तक मैं सोचता हूँ शाम से

  - Ameer Qazalbash
सुब्हतकमैंसोचताहूँशामसे
जीरहाहैकौनमेरेनामसे
शहरमेंसचबोलताफिरताहूँमैं
लोगख़ाइफ़हैंमिरेअंजामसे
रातभरजागेगाचौकी-दारएक
औरसबसोजाएँगेआरामसे
सौबरसकाहोगयामेरामज़ार
अबनवाज़ाजाऊँगाइनआमसे
साथलाऊँगाथकनबे-कारकी
घरसेबाहरजारहाहूँकामसे
नामलेउसकासफ़रआग़ाज़कर
दूररखदिलकोज़राऔहामसे
ज़िंदगीकीदौड़मेंपीछेथा
रहगयावोसिर्फ़दोइकगामसे
  - Ameer Qazalbash
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy