qibla-e-dil kaaba-e-jaan aur hai | क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है

  - Ameer Minai
क़िबला-ए-दिलकाबा-ए-जाँऔरहै
सज्दा-गाह-ए-अहल-ए-इरफ़ाँऔरहै
होकेख़ुशकटवातेहैंअपनेगले
आशिक़ोंकीईद-ए-क़ुर्बांऔरहै
रोज़-ओ-शबयाँएकसीहैरौशनी
दिलकेदाग़ोंकाचराग़ाँऔरहै
ख़ालदिखलातीहैफूलोंकीबहार
बुलबुलोअपनागुलिस्ताँऔरहै
क़ैदमेंआरामआज़ादीवबाल
हमगिरफ़्तारोंकाज़िंदाँऔरहै
बहर-ए-उल्फ़तमेंनहींकश्तीकाकाम
नूहसेकहदोयेतूफ़ाँऔरहै
किसकोअंदेशाहैबर्क़सैलसे
अपनाख़िर्मनकानिगहबाँऔरहै
दर्दवोदिलमेंवोसीनेपरहैदाग़
जिसकामरहमजिसकादरमाँऔरहै
काबा-रूमेहराब-ए-अबरू'अमीर'
अपनीताअ'तअपनाईमाँऔरहै
  - Ameer Minai
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