hai KHamoshii zulm-e-charkh-e-dev-paikar ka javaab | है ख़मोशी ज़ुल्म-ए-चर्ख़-ए-देव-पैकर का जवाब

  - Ameer Minai
हैख़मोशीज़ुल्म-ए-चर्ख़-ए-देव-पैकरकाजवाब
आदमीहोतातोहमदेतेबराबरकाजवाब
जोबगूलादश्त-ए-ग़ुर्बतमेंउठासमझायेमैं
करतीहैतामीरदीवानीमिरेघरकाजवाब
साथख़ंजरकेचलेगीवक़्त-ए-ज़ब्हअपनीज़बान
जानदेनेवालेदेतेहैंबराबरकाजवाब
सज्दाकरताहूँजोमैंठोकरलगाताहैवोबुत
पाँवउसकाबढ़केदेताहैमिरेसरकाजवाब
अब्रकेटुकड़ेउलझेंमेरीमौज-ए-अश्कसे
ख़ुश्कमग़्ज़ोंसेहैमुश्किलमिस्रा-ए-तरकाजवाब
वोखिंचाथामैंभीखिंचरहतातोबनतीकिसतरह
सरझुकादेताथाक़ातिलतेरेख़ंजरकाजवाब
जीते-जीमुमकिननहींउसशोख़काख़तदेखना
ब'अदमेरेआएगामेरेमुक़द्दरकाजवाब
शैख़कहताहैबरहमनकोबरहमनउसकोसख़्त
काबाबुत-ख़ानामेंपत्थरहैपत्थरकाजवाब
रोज़दिखलाताहैगर्दूंकैसीकैसीसूरतें
बुत-तराशीमेंहैयेकाफ़िरभीआज़रकाजवाब
हरजगहक़ब्र-ए-गदातकिएमेंहरजागोर-ए-शाह
एकघरइसशहरमेंहैदूसरेघरकाजवाब
जल्वा-गरहैनूर-ए-हक़होनेसेयकताई'अमीर'
सायाभीहोताअगरहोतापयम्बरकाजवाब
  - Ameer Minai
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