jab se zindagi hua dil gardish-e-taqdeer ka | जब से ज़िंदगी हुआ दिल गर्दिश-ए-तक़दीर का

  - Ambreen Haseeb Ambar
जबसेज़िंदगीहुआदिलगर्दिश-ए-तक़दीरका
रोज़बढ़जाताहैइकहल्क़ामिरीज़ंजीरका
मेरेहिस्सेमेंकहाँथींउजलतोंकीमंज़िलें
मेरेक़दमोंकोसदारस्तामिलाताख़ीरसे
किसलिएबर्बादियोंकादिलकोहैइतनामलाल
औरक्याअंदाज़ाहोख़म्याज़ा-ए-ता'मीरका
ख़ून-ए-दिलजिनकीगवाहीमेंहुआनज़्र-ए-वफ़ा
रंगतोवोउड़गएअबक्याकरूँँतस्वीरका
मैंनेसमझातेरीचाहतकोफ़क़तइनआ'म-ए-ज़ीस्त
मुझकोअंदाज़ाथाइसजुर्मइसता'ज़ीरका
एकलबतकहीपहुँचीजोदु'आथीमुस्तजाब
किसक़दरचर्चाहुआहैआह-ए-बे-तासीरका
लफ़्ज़कीहुरमतमुक़द्दमहैदिल-ओ-जाँसेमुझे
सचतआरुफ़हैमिरेहरशे'रहरतहरीरका
  - Ambreen Haseeb Ambar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy