ik gali se khushboo ki rasm-o-raah kaafi hai | इक गली से ख़ुश्बू की रस्म-ओ-राह काफ़ी है

  - Ambreen Haseeb Ambar
इकगलीसेख़ुश्बूकीरस्म-ओ-राहकाफ़ीहै
लाखजब्रमौसमहोयेपनाहकाफ़ीहै
निय्यत-ए-ज़ुलेख़ाकीखोजमेंरहेदुनिया
अपनीबे-गुनाहीकोदिलगवाहकाफ़ीहै
उम्र-भरकेसज्दोंसेमिलनहींसकीजन्नत
ख़ुल्दसेनिकलनेकोइकगुनाहकाफ़ीहै
आसमाँपेजाबैठेयेख़बरनहींतुमको
अर्शकेहिलानेकोएकगुनाहकाफ़ीहै
पैरवीसेमुमकिनहैकबरसाईमंज़िलतक
नक़्श-ए-पामिटानेकोगर्द-ए-राहकाफ़ीहै
चारदिनकीहस्तीमेंहँसकेजीलिए'अंबर'
बे-नशातदुनियासेयेनिबाहकाफ़ीहै
  - Ambreen Haseeb Ambar
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