mila bhi zeest men kya ranj-e-rah-guzar se kam | मिला भी ज़ीस्त में क्या रन्ज-ए-रह-गुज़ार से कम

  - Ambareen Haseeb ambar
मिलाभीज़ीस्तमेंक्यारन्ज-ए-रह-गुज़ारसेकम
सोअपनाशौक़-ए-सफ़रभीनहींग़ुबारसेकम
तिरेफ़िराक़मेंदिलकाअजीबआलमहै
कुछख़ुमारसेबढ़करकुछख़ुमारसेकम
हँसी-ख़ुशीकीरफ़ाक़तकिसीसेक्याचाहें
यहाँतोमिलतानहींकोईग़म-गुसारसेकम
वोमुंतज़िरहैयक़ीननहवा-ए-सरसरका
जोहब्सहोसकाबाद-ए-नौ-बहारसेकम
बुलंदियोंकेसफ़रमेंक़दमज़मींपेरहें
येतख़्त-ओ-ताजभीहोतेनहींहैंदारसेकम
अजीबरंगोंसेमुझकोसँवारदेतीहै
किवोनिगाह-ए-सताइशनहींसिंघारसेकम
मिरीअनाहीसदादरमियाँरहीहाएल
वगर्नाकुछभीनहींमेरेइख़्तियारसेकम
वोजंगजिसमेंमुक़ाबिलरहेज़मीरमिरा
मुझेवोजीतभी'अंबर'होगीहारसेकम
  - Ambareen Haseeb ambar
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