kab mausam-e-bahaar pukaara nahin kiya | कब मौसम-ए-बहार पुकारा नहीं किया

  - Ambareen Haseeb ambar
कबमौसम-ए-बहारपुकारानहींकिया
हमनेतिरेबग़ैरगवारानहींकिया
दुनियातोहमसेहाथमिलानेकोआईथी
हमनेहीए'तिबारदोबारानहींकिया
मिलजाएख़ाकमेंकहींइसख़यालसे
आँखोंनेकोईइश्क़सितारानहींकिया
इकउम्रकेअज़ाबकाहासिलवहींबहिश्त
दोचारदिनजहाँपेगुज़ारानहींकिया
आसमाँकिसलिएइसदर्जाबरहमी
हमनेतोतिरीसम्तइशारानहींकिया
अबहँसकेतेरेनाज़उठाएँतोकिसलिए
तूनेभीतोलिहाज़हमारानहींकिया
  - Ambareen Haseeb ambar
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