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Ambar
bahut koshishein ki bhulaane ki par
bahut koshishein ki bhulaane ki par | बहुत कोशिशें की भुलाने की पर
- Ambar
बहुत
कोशिशें
की
भुलाने
की
पर
तुम्हें
चाहना
मेरी
आदत
रही
- Ambar
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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मुझ
में
अब
मैं
नहीं
रही
बाक़ी
मैं
ने
चाहा
है
इस
क़दर
तुम
को
Ambreen Haseeb Ambar
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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इतना
सजधज
के
आओगे
तो
कैसे
तुमको
छोड़
के
दुनियादारी
देखें
हम
Ambar
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था
वो
कोमल
फूल
बराबर
मैं
ठहरा
बस
धूल
बराबर
जाओ
अपनी
मंज़िल
ढूँढों
अपना
मिलना
भूल
बराबर
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Ambar
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जो
भी
करते
सही
किए
होते
तुझको
दिल
से
बरी
किए
होते
माफ़
करता
कभी
ख़ुदा
न
मुझे
तुझ
सेे
जो
बेरुख़ी
किए
होते
जो
किया
था
हमारे
साथ
उसने
काश
हम
भी
वही
किए
होते
करते
हो
ऐतबार
ग़ैरों
पे
हम
पे
भी
तो
कभी
किए
होते
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Ambar
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ख़्वाबों
का
गुलदान
मिलेगा
जाने
कब
वो
सपना
अरमान
मिलेगा
जाने
कब
जिसके
लिए
दिल
कब
से
धड़-धड़
धड़के
है
मुझको
वो
बईमान
मिलेगा
जाने
कब
देखा
जाता
है
बस
भूखी
नज़रों
से
नारी
को
सम्मान
मिलेगा
जाने
कब
तू
भी
'अंबर'
श्रद्धा
भक्ती
रक्खा
कर
कहते
हैं
भगवान
मिलेगा
जाने
कब
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Ambar
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न
जुगनू
न
चंदा
न
तारे
कहो
मैं
अंबर
हूँ
अंबर
ही
प्यारे
कहो
Ambar
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