apna pan bhi jata nahin paaya | अपना पन भी जता नहीं पाया

  - Ambar
अपनापनभीजतानहींपाया
इकभीरोताहँसानहींपाया
सोचनेसेभलेहीकुछमिले
सोचताहूँवफ़ानहींपाया
क्यासलीक़ेसेहिज्रमाँगीथी
दिलभीउसकादुखानहींपाया
तन्हारहनानसीबमेंआया
मैंकभीकाफ़िलानहींपाया
लाखढूँढाउसेथाकाफ़िरने
परकहींभीख़ुदानहींपाया
क्याकरेगापतानहीं'अंबर'
हाल-ए-दिलभीबतानहींपाया
  - Ambar
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