hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ambar
ab keval doori hai bas
ab keval doori hai bas | अब केवल दूरी है बस
- Ambar
अब
केवल
दूरी
है
बस
तुमने
नफ़रत
की
है
बस
बात
हमारी
इतनी
है
बात
नहीं
करनी
है
बस
सारी
रात
न
सो
पाए
आँखें
रोई
सी
है
बस
जो
मेरा
इक
सपना
है
सपनों
में
दिखती
है
बस
- Ambar
Download Ghazal Image
मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
70 Likes
एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
Send
Download Image
28 Likes
दबी
कुचली
हुई
सब
ख़्वाहिशों
के
सर
निकल
आए
ज़रा
पैसा
हुआ
तो
च्यूँँटियों
के
पर
निकल
आए
अभी
उड़ते
नहीं
तो
फ़ाख़्ता
के
साथ
हैं
बच्चे
अकेला
छोड़
देंगे
माँ
को
जिस
दिन
पर
निकल
आए
Read Full
Mehshar Afridi
Send
Download Image
62 Likes
ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
111 Likes
आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
Send
Download Image
27 Likes
तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
Send
Download Image
122 Likes
हिज्र
में
तुमने
केवल
बाल
बिगाड़े
हैं
हमने
जाने
कितने
साल
बिगाड़े
हैं
Anand Raj Singh
Send
Download Image
80 Likes
किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
Send
Download Image
46 Likes
किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
Send
Download Image
53 Likes
उसे
समझने
का
कोई
तो
रास्ता
निकले
मैं
चाहता
भी
यही
था
वो
बे-वफ़ा
निकले
Waseem Barelvi
Send
Download Image
69 Likes
Read More
तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
Send
Download Image
0 Likes
कहते
थे
जी
लूँगा
तुम
बिन
आए
क्यूँँ
फिर
जी
लेना
था
Ambar
Send
Download Image
0 Likes
मेरे
भी
दो
चार
बने
हैं
मतलब
के
सब
यार
बने
हैं
Ambar
Send
Download Image
0 Likes
अब
इसके
सिवा
कोई
चारा
नहीं
मुहब्बत
करेंगे
दुबारा
नहीं
बहुत
आया
ग़ुस्सा
था
तुझपे
मगर
मना
शुक्र
तुझको
मैं
मारा
नहीं
हो
जितनी
भी
मुझ
में
सहनशीलता
तेरा
रूठ
जाना
गवारा
नहीं
इक
अरसे
तलक
मैं
रहा
मुंतज़िर
तुम्हीं
ने
था
मुझको
पुकारा
नहीं
ज़मीं
छोड़ने
पे
था
मजबूर
मैं
है
कौन
अपनी
माँ
का
दुलारा
नहीं
नहीं
टूट
सकता
करूँँ
क्या
सनम
कि
अंबर
हूँ
यारा
मैं
तारा
नहीं
Read Full
Ambar
Download Image
1 Like
अपना
पन
भी
जता
नहीं
पाया
इक
भी
रोता
हँसा
नहीं
पाया
सोचने
से
भले
ही
कुछ
न
मिले
सोचता
हूँ
वफ़ा
नहीं
पाया
क्या
सलीक़े
से
हिज्र
माँगी
थी
दिल
भी
उसका
दुखा
नहीं
पाया
तन्हा
रहना
नसीब
में
आया
मैं
कभी
काफ़िला
नहीं
पाया
लाख
ढूँढा
उसे
था
काफ़िर
ने
पर
कहीं
भी
ख़ुदा
नहीं
पाया
क्या
करेगा
पता
नहीं
'अंबर'
हाल-ए-दिल
भी
बता
नहीं
पाया
Read Full
Ambar
Download Image
1 Like
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Hawa Shayari
Violence Shayari
Haar Shayari
Mazdoor Shayari
Aitbaar Shayari