ghazal-goi ke fan ka yuñ kabhi izhaar hota hai | ग़ज़ल-गोई के फ़न का यूँँ कभी इज़हार होता है

  - Amanullah Shad Sanai
ग़ज़ल-गोईकेफ़नकायूँँकभीइज़हारहोताहै
मोहब्बतदिलसेहोतीहैनज़रसेप्यारहोताहै
तसादुमदोनिगाहोंकाभीक्याक्यागुलखिलाताहै
समीम-ए-क़ल्बसेफिरइश्क़काइक़रारहोताहै
मोहब्बतकरनेवालोंकाहसीनअंजामक्याजानो
शगुफ़्ताफूलखिलतेहैंगुल-ए-गुलज़ारहोताहै
वोजिससेप्यारकरताहैउसीकीचाहमेंहर-दम
मरीज़-ए-इश्क़बनबनकरसदाबीमारहोताहै
ज़मानेकीजफ़ाओंकाकोईशिकवानहींहरगिज़
वोमक़्तलमेंसजाताहैजोख़ुददिलदारहोताहै
धड़कतेदिलसेइकदूजेकीबाँहोंमेंसमाजाता
कहो'शाद'यहीअंजामआख़िरहोताहै
  - Amanullah Shad Sanai
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