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Aman Mishra 'Anant'
is se pahle juda ho jaaun main
is se pahle juda ho jaaun main | इस से पहले जुदा हो जाऊँ मैं
- Aman Mishra 'Anant'
इस
से
पहले
जुदा
हो
जाऊँ
मैं
आ
तुझे
अपना
दिल
दिखाऊँ
मैं
शे'र
तो
ख़ैर
सारे
सुन
लेंगे
अपना
ये
दुख
किसे
सुनाऊँ
मैं
साल
जब
पूरा
ग़म
में
झोंक
दिया
जन्म-दिन
किस
लिए
मनाऊँ
मैं
आपके
दिल
में
भीड़
इतनी
है
अपना
बिस्तर
कहाँ
बिछाऊँ
मैं
चल
मेरे
साथ
देखने
तुझको
चल
तुझे
आज
तू
दिखाऊँ
मैं
- Aman Mishra 'Anant'
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Ataul Hasan
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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हम
ऐसे
बुज़दिलों
की
मान
साँई
तो
कर
दे
रात
का
ऐलान
साँई
मैं
दो
आँखों
में
पढ़कर
आ
गया
हूँ
तेरी
धरती
का
सारा
ज्ञान
साँई
बड़ी
बिटिया
का
मंडप
सज
रहा
था
अचानक
आ
गया
तूफ़ान
साँई
उसे
अम्मी
की
धमकी
खा
गई
थी
पिता
जी
के
हमें
अरमान
साँई
हैं
पंडित
हम
मगर
रोज़े
रखे
थे
था
इक
मरयम
पे
यूँँ
ईमान
साँई
ले
दे
देना
किसी
हारे
हुए
को
ले
मैं
ने
दान
कर
दी
जान
साँई
थी
इनके
बिन
भी
क़ुदरत
ख़ूब-सूरत
बनाए
किस
लिए
इंसान
साँई
वो
जैसे
इक
कोई
परमाणु
बम
थी
मैं
पैंतालीस
का
जापान
साँई
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Aman Mishra 'Anant'
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सामने
तेरे
हमारा
सोचता
हूँ
मैं
नज़ारे
से
नज़ारा
सोचता
हूँ
डर
लगेगा
दर्द
होगा
या
ख़ुशी
तब
जब
मिलेंगे
हम
दुबारा
सोचता
हूँ
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Aman Mishra 'Anant'
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कब
तक
आपा
खोया
जाए
रोकर
कितना
रोया
जाए
इस
सेे
पहले
सपने
आएँ
बेहतर
होगा
सोया
जाए
कुछ
लम्हें
भी
काफ़ी
है
क्यूँँ
भार
जनम
का
ढोया
जाए
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Aman Mishra 'Anant'
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लिखें
कैसे
कि
इच्छा
मर
चुकी
है
हमारी
डायरी
भी
भर
चुकी
है
दु'आ
अब
जितनी
मर्ज़ी
कर
ले
कोशिश
बला
ये
काम
अपना
कर
चुकी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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कभी
ये
देखना
कितनी
वो
अब
दिलशाद
रहती
है
जो
तन्हाई
हमारे
साथ
तेरे
बाद
रहती
है
हमारा
जन्मदिन
कैसे
तू
यारा
भूल
जाता
है
हमें
तो
दोस्तो
की
सिगरटें
तक
याद
रहती
है
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Aman Mishra 'Anant'
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