be-bason pe yatiimon pe hansati rahi | बे-बसों पे यतीमों पे हँसती रही

  - Altaf Tanveer
बे-बसोंपेयतीमोंपेहँसतीरही
फ़िक़रेबे-कसपेदुनियायेकसतीरही
कुछभीदुनियामेंउसकातोअपनानहीं
फिरभीक्यूँजानदुनियामेंफॅंसतीरही
चाहीजोने'मतेंतुमवोखातेरहे
बूढ़ीमाँदेखकरहीतरसतीरही
मैंबुलंदीकीपरवाज़करतारहा
जोरहीमेरीमंज़िलसोपस्तीरही
शुक्रहरहालमेंक्यूँकरताभला
आज़माइशमिरीतंग-दस्तीरही
उम्रभरज़िंदगीकोमैंरोतारहा
उम्रभरज़िंदगीमुझपेहँसतीरही
एकसूबरहमीएकजानिबख़ुशी
दिलकेजोपासथीदिलमेंबस्तीरही
बादरुख़्सतके'तनवीर'येचश्म-ए-नम
क्यूँउसेदेखनेकोतरसतीरही
  - Altaf Tanveer
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