haq vafaa ke jo ham jataane lage | हक़ वफ़ा के जो हम जताने लगे

  - Altaf Hussain Hali
हक़वफ़ाकेजोहमजतानेलगे
आपकुछकहकेमुस्कुरानेलगे
थायहाँदिलमेंतान-ए-वस्ल-ए-अदू
उज़्रउनकीज़बाँपेआनेलगे
हमकोजीनापड़ेगाफ़ुर्क़तमें
वोअगरहिम्मतआज़मानेलगे
डरहैमेरीज़बाँखुलजाए
अबवोबातेंबहुतबनानेलगे
जानबचतीनज़रनहींआती
ग़ैरउल्फ़तबहुतजतानेलगे
तुमकोकरनापड़ेगाउज़्र-ए-जफ़ा
हमअगरदर्द-ए-दिलसुनानेलगे
सख़्तमुश्किलहैशेवा-ए-तस्लीम
हमभीआख़िरकोजीचुरानेलगे
जीमेंहैलूँरज़ा-ए-पीर-ए-मुग़ाँ
क़ाफ़िलेफिरहरमकोजानेलगे
सिर्र-ए-बातिनकोफ़ाशकरयारब
अहल-ए-ज़ाहिरबहुतसतानेलगे
वक़्त-ए-रुख़्सतथासख़्त'हाली'पर
हमभीबैठेथेजबवोजानेलगे
  - Altaf Hussain Hali
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