junoon ka raqs bhi kab tak karunga | जुनूँ का रक़्स भी कब तक करूँँगा

  - Alok Mishra
जुनूँकारक़्सभीकबतककरूँँगा
कहींमैंभीठिकानेजालगूँगा
हुआजाताहैतनयेबोझमुझपर
मगरयेदुखभीअबकिससेकहूँगा
भुलादूँक्यूँमैंइसचुपकोआख़िर
ज़रासेज़ख़्मकोकितनाकरूँँगा
ख़ुदाकेरंगभीसबखुलगएहैं
गुनाहअपनेभीमैंक्यूँँकरगिनूँगा
तिरीख़ामोशियोंकीधूपमेंभी
तिरीआवाज़मेंभीगारहूँगा
अभीबे-बातकितनाहँसरहाहूँ
निकलकरबज़्मसेगिर्याकरूँँगा
नहींवा'दानहींहोगाकोईअब
बहुतहोगातोबसज़िंदारहूँगा
  - Alok Mishra
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