जुनूँकारक़्सभीकबतककरूँँगा
कहींमैंभीठिकानेजालगूँगा
हुआजाताहैतनयेबोझमुझपर
मगरयेदुखभीअबकिससेकहूँगा
भुलादूँक्यूँनमैंइसचुपकोआख़िर
ज़रासेज़ख़्मकोकितनाकरूँँगा
ख़ुदाकेरंगभीसबखुलगएहैं
गुनाहअपनेभीमैंक्यूँँकरगिनूँगा
तिरीख़ामोशियोंकीधूपमेंभी
तिरीआवाज़मेंभीगारहूँगा
अभीबे-बातकितनाहँसरहाहूँ
निकलकरबज़्मसेगिर्याकरूँँगा
नहींवा'दानहींहोगाकोईअब
बहुतहोगातोबसज़िंदारहूँगा