sakhtiyan karta hooñ dil par gair se ghaafil hooñ main | सख़्तियाँ करता हूँ दिल पर ग़ैर से ग़ाफ़िल हूँ मैं

  - Allama Iqbal
सख़्तियाँकरताहूँदिलपरग़ैरसेग़ाफ़िलहूँमैं
हाएक्याअच्छीकहीज़ालिमहूँमैंजाहिलहूँमैं
मैंजभीतकथाकितेरीजल्वा-पैराईथी
जोनुमूद-ए-हक़सेमिटजाताहैवोबातिलहूँमैं
इल्मकेदरियासेनिकलेग़ोता-ज़नगौहर-ब-दस्त
वाएमहरूमीख़ज़फ़चैनलबसाहिलहूँमैं
हैमिरीज़िल्लतहीकुछमेरीशराफ़तकीदलील
जिसकीग़फ़लतकोमलकरोतेहैंवोग़ाफ़िलहूँमैं
बज़्म-ए-हस्तीअपनीआराइशपेतूनाज़ाँहो
तूतोइकतस्वीरहैमहफ़िलकीऔरमहफ़िलहूँमैं
ढूँढताफिरताहूँमैं'इक़बाल'अपने-आपको
आपहीगोयामुसाफ़िरआपहीमंज़िलहूँमैं
  - Allama Iqbal
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