apne se be-samajh ko haq ki kahaan pachhaanat | अपने से बे-समझ को हक़ की कहाँ पछानत

  - Alimullah
अपनेसेबे-समझकोहक़कीकहाँपछानत
'मन-अरफ़ा'कोबूझा'क़द-अरफ़ा'सूँजिहालत
हैफ़र्ज़बूझअव्वलअपनापिछेख़ुदाको
बे-बूझबंदगीहैसबरंजऔरमलामत
जन्नतकीतूमज़दूरीबूझाहैबंदगीको
बख़्शिशनहींहैहरगिज़जुज़लुत्फ़औरइनायत
हिर्स-ओ-हवामेंपड़करहक़सूँहुआहैबातिल
फिरमाँगताहैजन्नतक्यानफ़्स-ए-बद-ख़सालत
बिनक़ल्बकीहुज़ूरीमंज़ूरक्यूँँपड़ेगा
रोज़ानमाज़रस्मीसज्दासुजूदताअत
माबूदकेमुक़ाबिलआबिदकोअबदियतहै
ग़ीबतमेंचुपरिझानाक्यामहज़हैख़जालत
तननफ़्सऔरदिलरूहसरनूर-ए-ज़ातमिलकर
अपनेमेंहक़कोपानाहैअफ़ज़लुलइबादत
बिनपीरकेख़ुदाकोपायाकोईहरगिज़
कामिलकोक्यूँँपछानेबे-सिदक़बे-हिदायत
नहींहै'अलीम'कोसचतक़्वाअमलपेअपने
दीदारकासनमकेकाफ़ीहैइस्तक़ामत
  - Alimullah
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