kis tarah jaaun ki ye aa.e hue raat men hain | किस तरह जाऊँ कि ये आए हुए रात में हैं

  - Ali Zubair
किसतरहजाऊँकियेआएहुएरातमेंहैं
येअंधेरेनहींहैंसाएमिरीघातमेंहैं
मिलतारहताहूँमैंउनसेतोयेमिललेतेहैं
यारअबदिलमेंनहींरहतेमुलाक़ातमेंहैं
येतोनाकामअसासाहैसमुंदरकेपास
कुछग़ज़बनाकसीलहरेंमिरेजज़्बातमेंहैं
येधुएँमेंजोनज़रआतेहैंसरसब्ज़यहाँ
येमकाँशहरमेंहोकरभीमज़ाफ़ातमेंहैं
दिलकाछूनाथाकिजज़्बातहुएपत्थरके
ऐसालगताहैकिहमशहर-ए-तिलिस्मातमेंहैं
मैंहीतकरारहूँऔरमैंहीमुकर्ररहूँयहाँ
वक़्तपरचलतेहुएदिनमिरीऔक़ातमेंहैं
  - Ali Zubair
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