takhleeq pe fitrat ki guzarta hai gumaan aur | तख़्लीक़ पे फ़ितरत की गुज़रता है गुमाँ और

  - Ali Sardar Jafri
तख़्लीक़पेफ़ितरतकीगुज़रताहैगुमाँऔर
इसआदम-ए-ख़ाकीनेबनायाहैजहाँऔर
येसुब्हहैसूरजकीसियाहीसेअँधेरी
आएगीअभीएकसहरमहर-चकाँऔर
बढ़नीहैअभीऔरभीमज़लूमकीताक़त
घटनीहैअभीज़ुल्मकीकुछताब-ओ-तवाँऔर
तरहोगीज़मींऔरअभीख़ून-ए-बशरसे
रोएगाअभीदीदा-ए-ख़ूनाबा-फ़िशाँऔर
बढ़नेदोज़राऔरअभीकुछदस्त-ए-तलबको
बढ़जाएगीदोचारशिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-बुताँऔर
करनाहैअभीख़ून-ए-जिगरसर्फ़-ए-बहाराँ
कुछदेरउठानाहैअभीनाज़-ए-ख़िज़ाँऔर
हमहैंवोबला-कशकिमसाइबसेजहाँके
होजातेहैंशाइस्ता-ए-ग़म-हा-ए-जहाँऔर
  - Ali Sardar Jafri
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