jawaani hareef-e-sitam hai to kya gham | जवानी हरीफ़-ए-सितम है तो क्या ग़म

  - Ali Jawwad Zaidi
जवानीहरीफ़-ए-सितमहैतोक्याग़म
तग़य्युरहीअगलाक़दमहैतोक्याग़म
हरइकशयहैफ़ानीतोयेग़मभीफ़ानी
मिरीआँखगरआजनमहैतोक्याग़म
मिरेहाथसुलझाहीलेंगेकिसीदिन
अभीज़ुल्फ़-ए-हस्तीमेंख़महैतोक्याग़म
ख़ुशीकुछतिरेहीलिएतोनहींहै
अगरहक़मिराआजकमहैतोक्याग़म
मिरेख़ूँपसीनेसेगुलशनबनेंगे
तिरेबसमेंअब्र-ए-करमहैतोक्याग़म
मिराकारवाँबढ़रहाहैबढ़ेगा
अगररुख़पेगर्द-ए-अलमहैतोक्याग़म
येमानाकिरहबरनहींहैमिसाली
मगरअपनेसीनेमेंदमहैतोक्याग़म
मिराकारवाँआपरहबरहैअपना
येशीराज़ाजबतकबहमहैतोक्याग़म
तिरेपासतबलअलमहैंतोहोंगे
मिरेपासज़ोर-ए-क़लमहैतोक्याग़म
  - Ali Jawwad Zaidi
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