deen o dil pahli hi manzil men yahaañ kaam aa.e | दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए

  - Ali Jawwad Zaidi
दीनदिलपहलीहीमंज़िलमेंयहाँकामआए
औरहमराह-ए-वफ़ामेंकोईदोगामआए
तुमकहोअहल-ए-ख़िरदइश्क़मेंक्याक्याबीती
हमतोइसराहमेंना-वाक़िफ़-ए-अंजामआए
लज़्ज़त-ए-दर्दमिलीइशरत-ए-एहसासमिली
कौनकहताहैहमउसबज़्मसेनाकामआए
वोभीक्यादिनथेकिइकक़तरा-ए-मयभीमिला
आजआएतोकईबारकईजामआए
इकहसींयादसेवाबस्ताहैंलाखोंयादें
अश्कउमँडआतेहैंजबलबपेतिरानामआए
सीलिएहोंटमगरदिलमेंख़लिशरहतीहै
इसख़मोशीकाकहींउनपेइल्ज़ामआए
चंददीवानोंसेरौशनथीगलीउल्फ़तकी
वर्नाफ़ानूसतोलाखोंहीसर-ए-बामआए
येभीबदलेहुएहालातकापरतवहैकिवो
ख़ल्वत-ए-ख़ाससेताजल्वा-गह-ए-आमआए
होकेमायूसमैंपैमानाभीजबतोड़चुका
चश्म-ए-साक़ीसेपियापेकईपैग़ामआए
शहरमेंपहलेसेबदनामथेयूँँभी'ज़ैदी'
होकेमय-ख़ानेसेकुछऔरभीबदनामआए
  - Ali Jawwad Zaidi
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