ahl-e-dil fasaanon men zikr-e-yaar karte hain | अहल-ए-दिल फ़सानों में ज़िक्र-ए-यार करते हैं

  - Ali Asghar
अहल-ए-दिलफ़सानोंमेंज़िक्र-ए-यारकरतेहैं
मुस्कुराकेमहफ़िलकोअश्क-बारकरतेहैं
बद-नसीबधरतीकीदास्ताँहीऐसीहै
इसकेचाहनेवालेइसपेवारकरतेहैं
धज्जियोंकेसौदा-गरआएँकेलेजाएँ
हमख़ुशीसेदामनकोतार-तारकरतेहैं
हादसोंकेकंधोंपरजिस्म-ओ-जाँकोलेआओ
अस्पतालकेकमरेइंतिज़ारकरतेहैं
भूली-बिसरीयादोंकेबर्फ़-दानमेंरखदो
ख़्वाबजोतुम्हेंअक्सरबे-क़रारकरतेहैं
जोड़-तोड़लफ़्ज़ोंकाशाइ'रीनहींहोता
लोगजानेक्यूँऐसाबारबारकरतेहैं
  - Ali Asghar
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