jab tujhe milne ki tadbeer nayi hoti hai | जब तुझे मिलने की तदबीर नई होती है

  - Ali Arman
जबतुझेमिलनेकीतदबीरनईहोतीहै
सूरत-ए-गर्दिश-ए-तक़दीरनईहोतीहै
मुंहदिमहोताहूँहरआनपस-ए-हर्फ़-ए-कुहन
तबकहींशे'रकीता'बीरनईहोतीहै
कैसेलौटामैंतिरेदस्त-ए-ज़माना-गरमें
तेरेछूनेसेतोतस्वीरनईहोतीहै
वक़्तदेजाएजिसेयादपुरानीकोई
रोज़उसहर्फ़कीतासीरनईहोतीहै
इकअजबकैफ़मेंचलताहूँसर-ए-दश्त-ए-बला
जबमिरेपाँवमेंज़ंजीरनईहोतीहै
हमबदलतेनहीं'अरमान'कभीजाह-ओ-हशम
हाँइसीख़्वाबकीता'बीरनईहोतीहै
  - Ali Arman
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