zabt-e-gham par zawaal kyuuñ aaya | ज़ब्त-ए-ग़म पर ज़वाल क्यूँ आया

  - Aleena Itrat
ज़ब्त-ए-ग़मपरज़वालक्यूँआया
शिद्दतोंमेंउबालक्यूँआया
गुलसेखिलवाड़कररहीथीहवा
दिलकोतेराख़यालक्यूँआया
इश्क़तोहिज्रकीअलामतहै
वस्लकाफिरसवालक्यूँआया
ऐसाबदलीनेक्याकियाआख़िर
सूरजइतनानिढालक्यूँआया
सूनीआँखोंमेंक्यामिलातुमको
झीलजैसाख़यालक्यूँआया
उम्रभरआईनेपेरखीनज़र
अक्समेंफिरयेबालक्यूँआया
यूँँहीपागलहवाकेछूनेसे
तुझमेंदरियाउछालक्यूँआया
इश्क़तुमकोनहींहुआतोकहो
शाइ'रीमेंकमालक्यूँआया
  - Aleena Itrat
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy