शामकेवक़्तचराग़ोंसीजलाईहुईमैं
घुपअँधेरोंकीमुंडेरोंपेसजाईहुईमैं
देखनेवालोंकीनज़रोंकोलगूँसादावरक़
तेरीतहरीरमेंहूँऐसेछुपाईहुईमैं
ख़ाककरकेमुझेसहरामेंउड़ानेवाले
देखरक़्साँहूँसर-ए-दश्तउड़ाईहुईमैं
क्याअँधेरोंकीहिफ़ाज़तकेलिएरक्खीहूँ
अपनीदहलीज़पेख़ुदआपजलाईहुईमैं
लोगअफ़्सानासमझकरमुझेसुनतेहीरहे
दर-हक़ीक़तहूँहक़ीक़तसेबनाईहुईमैं
मेरीआँखोंमेंसमायाहुआकोईचेहरा
औरउसचेहरेकीआँखोंमेंसमाईहुईमैं
कितनीहैरानहैदुनियाकिमुक़द्दरकीनहीं
अपनीतदबीरकेहाथोंहूँबनाईहुईमैं
मेरेअंदाज़पेता-देर'अलीना'वोहँसा
ज़िक्रमेंउसकेथीयूँँख़ुदकोभुलाईहुईमैं