bhigo gaii gul-e-ehsaas aaj shabnam phir | भिगो गई गुल-ए-एहसास आज शबनम फिर

  - Aleena Itrat
भिगोगईगुल-ए-एहसासआजशबनमफिर
बदनकेगिर्दलिपटनेलगाहैरेशमफिर
येकिसख़यालकेकुंदनसेसजगयातन-मन
भरेहैंकासा-ए-हस्तीमेंकिसनेनीलमफिर
बहारबूँदेंघटाख़ुश-गवारपुर्वाई
मिरेसिंगारकेक्यागएहैंमौसमफिर
बतारहीहैंयेसरगोशियाँसमुंदरकी
किख़ुश्करेतसेदरियाकाहोगासंगमफिर
कईचराग़जोयेजलउठेहैंआँखोंमें
सुनोजुदाईउन्हेंकरपाएमद्धमफिर
तिरीजुदाईकेसद
मेंसेयूँँहुएमोहतात
इसकेबा'दहुईफिरयेआँखपुर-नमफिर
'अलीना'इकदफ़ाइकआगमेंतपाथाबदन
तमामउम्रहुईवोआँचकमकमफिर
  - Aleena Itrat
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