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Akshay Sopori
mere baare men kahtaa firta hai yahii sabse
mere baare men kahtaa firta hai yahii sabse | मेरे बारे में कहता फिरता है यही सब सेे
- Akshay Sopori
मेरे
बारे
में
कहता
फिरता
है
यही
सब
सेे
लड़का
ठीक
है
लेकिन
चूमता
ज़्यादा
है
- Akshay Sopori
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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परवरदिगार
आपके
सब
फैसले
अजीब
हैं
जो
तंग
था
वो
तंग
है
जो
ठीक
था
वो
मर
गया
Adnan Raza
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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मुझे
आज़ाद
कर
दो
एक
दिन
सब
सच
बता
कर
तुम्हारे
और
उसके
दरमियाँ
क्या
चल
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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लहजा
ही
थोड़ा
तल्ख़
है
दुनिया
के
सामने
वैसे
तो
ठीक
ठाक
हूँ
मैं
बोल-चाल
में
Ankit Maurya
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मुनासिब
नहीं
होगी
जन्नत
भी
यारों
सुना
है
वहाँ
सब
से
सब
पूछते
है
Akshay Sopori
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तजस्सुस
है
कि
उन
दो
आँखोंँ
में
ऐसा
रखा
क्या
है
शनावर
अच्छे
अच्छे
डूब
के
जिन
में
आ
जाते
हैं
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Akshay Sopori
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वो
सदा
जो
कि
कान
में
आई
पहले
दिल
के
मकान
में
आई
टूटे
होंगे
ज़रूर
कुछ
के
दिल
अक्ल
तो
ही
जहान
में
आई
आख़िरी
रात
शहर
में
उसकी
बस
अचानक
गुमान
में
आई
लब
चबाए
थे
किसने
झगड़े
में
नर्मी
कैसे
ज़बान
में
आई
चाहता
था
गुलाब
दूँ
उसको
दोस्ती
दरमियान
में
आई
जान-ए-जाँ
भूलने
की
ठानी
थी
जान-ए-जाँ
और
ध्यान
में
आई
मैं
जिसे
सोचता
हुआ
सोया
रात
को
आसमान
में
आई
पूछ
क्यूँ
देखता
हूँ
पढ़ता
हूँ
तू
अगर
इम्तिहान
में
आई
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Akshay Sopori
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दिल
लगाने
से
ये
दिल
डरता
नहीं
है
मेरा
दिल
इस
बात
से
डरता
बहुत
है
Akshay Sopori
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लोग
जो
हँसते-मुस्कुराते
हैं
बस
तुम्हारे
ही
गीत
गाते
हैं
तुम
ख़ुदास
उदास
होती
हो
बाग़
में
फूल
सूख
जाते
हैं
मछली
पानी
में
डूब
जाती
हैं
पेड़ों
से
पंछी
कूद
जाते
हैं
ये
नज़र
ये
तुम्हीं
पे
रहती
है
साठ
आते
हैं,
साठ
जाते
हैं
सोचने
पे
ग़ज़ल
निकलती
है
देख
कर
शे'र
फूट
जाते
हैं
सोचो
बे-पर्दा
सोचने
भर
से
आँखों
में
पर्दे
छूट
जाते
हैं
बाद
नब्बे
के,
इश्क़
में
देखो
तीन
ज़हरीले
साँप
आते
हैं
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Akshay Sopori
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